पचासों साल से असम में रहे वाले बिहार अउर पूर्वांचल के भोजपुरिया समाज के लोगन खातिर इ भारी बेइज्जती वाला बात ह कि उनकर 15000 भाइयन के नागरिकता रजिस्टर से बाहर कर दिहल गइल. उनकरा खातिर इ चिंता क बातो ह कि उनकर आपन भाइयन का भविष्य का होई.

असम विधानसभा चुनाव में दो चरण क मतदान हो चुकल ह. तीसरा चरण क मतदान 6 मार्च के होई. परदेस क मतदान प्रक्रिया लगभगे खतमें होवे वाला ह भलेहू रिजल्ट 2 मई के आई लेकिन समूचा चुनाव परचार में कऔनों दल चाहे भाजपा चाहे कांग्रेस की ओरि से उ 15000 भोजपुरिया लोगन के बारे में एगो शबद नाही बोलल गइल जेकर नाम एनआरसी माने राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर से बाहर हो गइल ह. पचासों साल से असम में रहे वाले बिहार अउर पूर्वांचल के भोजपुरिया समाज के लोगन खातिर इ भारी बेइज्जती वाला बात ह कि उनकर 15000 भाइयन के नागरिकता रजिस्टर से बाहर कर दिहल गइल. उनकरा खातिर इ चिंता क बातो ह कि उनकर आपन भाइयन का भविष्य का होई. चिंता एसे कि एके परिवार क कुछ लोगन क नाम नागरिकता रजिस्टर में ह अउर उहे परिवार क कई लोगन का नाम रजिस्टर से गायब ह. जबकि उ परिवार के सबहि लोग एके तरह क कागज नागरिकता सबूत के तौर पर पेश कइले रहलें.

असम के भोजपुरिया समाज क गोस्सा आ चिंता इ बात के लेके भी ह कि कऔनो भी दल ए बार क चुनाव परचार में एनआरसी से बाहर हो गइल लोगन के बारे में कऔनों वादा ना कइलस. एनआरसी क अंतिम सूची जब 31 अगस्त 2019 के जारी होइल त ओमे से लगभग 19 लाख लोगन क नाम नदारद रहे जे सालों से असम में नागरिक के तौर पर रहत रहे. एमे से लगभग 5 लाख हिंदू लोगन क नाम ह. ओहू में अधिका हिंदू बंगालिन क नाम ह बाकी मारवाड़ी अउर बिहार पूर्वांचल क भोजपुरिया भाई लोग. मानल जाला कि 2016 में भाजपा क असम में सरकार बनावे में इ सबहिन क सहयोग रहे. ई भाजपा खातिर भी चिंता क बात रहे कि जऔन हिंदू राष्ट्रवाद क बात कइके भाजपा सत्ता क सुख भोग रहल ह उहे हिंदू समाज क पांच लाख लोग नागरिकता रजिस्टर से बाहर हो गइल. कहल जाला कि एकरा बादे केंद्र क भाजपा सरकार संसद में नागरिकता संसोधन बिल लेके आइल अउर सीएए माने नागरिकता संसोधन अधिनियम बनल. सीएए में 2014 तक भारत क पड़ोसी देशन से आइल हिंदू, बौद्ध, जैन, सिख अउर ईसाई धरम के लोगन के नागरिकता देबे क प्रावधान ह.

सीएए में पड़ोसी देश से आइल मुसलिम समाज के लोगन के नागरिकता देबे क कऔनो प्रावधान न होवे के चलिता देश भर क मुस्लिम समाज में सीएए के लेके विरोध होवे लागल. एकरा साथे ही केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह क इ बयान आइल कि उनकर सरकार देश भर में एनआरसी लागू करी. एकरा चलते भी मुसलिम समाज अउर नाराज हो गइल अउर देश भर में धरना देबे लागल. मुस्लिम समाज क विरोध धरना परदशन के आगा त भाजपा सरकार ना झुकल लेकिन असम में सीएए क चौतरफा भारी विरोध के चलिते ओके झुके के पड़ल. शायद इहे कारण ह कि संसद से सीएए बनना के बादो आज तक एकर अधिसूचना जारी नाही होइल ह. कहे क मतलब इ कि आजो सीएए कानून क रूप में लागू नाही हो पाइल ह. असम क विधानसभा चुनाव परचार में परदेश क भाजपा सरकार सीएए के लेके कऔनो बात नाही करत ह. सवाल पूछला पर सबहि भाजपा नेतवन क जवाब होला कि सीएए चुनाव में कऔनो मुद्दा नाही ह .. चुनाव त हम विकास के नाम पर लड़त हईं जऔन पांच साल में कइल गइल ह. जबकि बंगाल चुनाव में भाजपा क संकल्प पत्र में कहल गइल ह कि सत्ता में अइते ही पहिला कैबिनेट बइठक में बंगाल में सीएए लागू करे पर मोहर लगावल जाई. बंगाल में कुछ समाज के रिझावे खातिर सीएए के संकल्प पत्र में शामिल कइल गइल ह अउर जउन असम क पांच लाख हिंदू लोगन के नागरिकता देबे खातिर सीएए कानून बनावल गइल उ असम में सीएए क नाम लेबे से भी बचत हउअन भाजपा नेता.

दोसरा ओर असम खातिर कांग्रेस क घोषणापत्र में सरकार बनते ही सीएए कानून के निरस्त करे क वादा कइल गइल ह. असम में आपन हेराइल आधार के फेरो पावे खातिर मूल असमिया निवासी क मूल भावना के चलिता ही कांग्रेस सीएए के विरोध कर रहल ह. 1980 के असम आंदोलन के पीछे असमिया अउर गैर असमिया विवाद रहे. असम आंदोलन में स्थानीय भाषा बोली अउर संस्कृति बचाओ क ही संघर्ष रहे. 1994 क अमस समझौता में भी 1971 के बाद असम में बाहर से बिशेषकर बांग्लादेश के आइल लोगन क पहचान कर बाहर करे क बात रहे. 2013 में सुप्रीम कोर्ट क पहल पर असम खातिर शुरू कइल गइल एऩआरसी प्रक्रिया में भी 1971 तक असमिया नागरिक के चिन्हित करे क प्रावधान रहे. असम आंदोलन कहे क त बांग्लादेशी नागरिकन के विरोध में रहे लेकिन मूल असमिया भावना गैर असमिया लोगन के विरोध में रहे.इहे कारण ह कि सीएए बनला क सबसे अधिका विरोध मूल असमिया लोगन के बीच होइल. जबकि एनआरसी से बाहर होइल 5 लाख लोगन के सीएए से आस जगल रहे कि उनके असम क नागरिकता फेरो वापस मिल जाई. 15000 भोजपुरी समाज के लोगन के त बिशेष आस रहे. एसे कि 1990 के अलग असम बनावे के आतंकवादी संगठन अल्फा के आंदोलन क सबसे ज्यादा शिकार बिहार अउर पूर्वांचल के भोजपुरी भाई लोग ही होइल रहे. अउर असम में भाजपा का परभाव बढ़े लागल त असमिया समाज में ओके भोजपुरी जनता पार्टी कहल गइल. असम में भाजपा के सरकार भी बनल. जाहिर ह कि उनकर सरकार बनावे में भोजपुरी समाज क भी हाथ रहे लेकिन अब उनकर परेशानी अउर बढ़ गइल ह. उनकरा समझ में ना आवत ह कि उनकर समाज केकरा पक्ष क बात करे… भाजपा के पक्ष क जे इ चुनाव में 15000 भोजपुरी भइयन के बारे में एगो शबद ना बोलत ह आ कि कांग्रेस के पक्ष क जे एक समय मतंग सिंह जइसन एगो सामान्य मनई के राज्यसभा भेज के भोजपुरी समाज क मान बढ़ौले रहे, अउर अब सीएए के रद्द करे क बात कर रहल ह. (लेखक सुशील कुमार सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं.)







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