नोएडा स्थित अपने आवास पर कर्नल अशोक तारा (रि.) | सूरज सिंह बिष्ट | दिप्रिंट


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नई दिल्ली: 13 दिन चले बांग्लादेश मुक्ति संग्राम युद्ध खत्म होने के ठीक बाद की बात है, जब ढाका एयरपोर्ट के पास तैनात पाकिस्तानी सैनिकों की एक टुकड़ी को उस समय तक यह भनक भी नहीं लगी थी कि उनकी सेना ने भारतीय सेना के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है.

एक दर्जन के आसपास पाकिस्तानी सैनिकों ने बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के नेता शेख मुजीबुर रहमान के परिवार को उनके धानमंडी स्थित आवास पर ही बंधक बना रखा था. बंधक बनाए गए लोगों में रहमान की बेटी शेख हसीना, जो इस समय प्रधानमंत्री हैं और उनका बेटा भी शामिल थे.

कथित तौर पर सैनिकों के पास इस परिवार को खत्म कर देने का आदेश था. लेकिन उन आदेशों पर कभी अमल नहीं हो पाया.

परिवार को बचाने का जिम्मा भारतीय सेना के एक बहादुर युवा अधिकारी को सौंपा गया जो निहत्था ही पाकिस्तानी सैनिकों के सामने जा खड़ा हुआ और वहां के हालात को संभाला. सीधे अपनी तरफ बंदूक तनी होने के बावजूद वह वहीं डटा रहा. उसने पाकिस्तानी सैनिकों से कहा कि युद्ध समाप्त हो गया है और उनके साथ तर्क-वितर्क करता रहा.

यह तरीका कारगर रहा और परिवार को छोड़ दिया गया. इस बीच, पाकिस्तानी सैनिकों को सुरक्षित उनके देश लौटने देने के वादे के साथ छोड़ा गया.

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