सुरक्षा बलों के पास माडवी के युवा काल की दो पुरानी तस्वीरें हैं/स्पेशल अरेंजमेंट


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नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ के बीजापुर में रविवार को सुरक्षा बलों पर घात लगाकर किए गए हमले में शामिल 55 वर्षीय माओवादी कमांडर माडवी हिडमा 2004 के बाद से कथित तौर पर 27 हमलों को अंजाम देने वालों में शामिल रहा है. इसमें 2013 का नरसंहार, जिसमें राज्य कांग्रेस का लगभग पूरा नेतृत्व खत्म हो गया था, और 2010 की दंतेवाड़ा मुठभेड़ भी शामिल है, जिसमें सीआरपीएफ के 76 जवान शहीद हुए थे.

छत्तीसगढ़ पुलिस के सूत्रों के अनुसार, हिडमा को ‘सुरक्षा बलों के खिलाफ हमलों की सुनियोजित साजिश’ रचने और उन्हें ‘काफी हद तक सफलता’ के साथ अंजाम देने के लिए जाना जाता है.

हिडमा, जिसे हिडमालु के नाम से भी जाना जाता है, का जन्म दक्षिण सुकमा के पुरवती गांव में हुआ था और वह बीजापुर की एक स्थानीय जनजाति से संबंध रखता है. माना जाता है कि वह 2001 की शुरुआत में नक्सली बना था. सूत्रों ने बताया कि ‘बेहद अनुशासित, चतुर, तेज और क्रूर’ होने के कारण ही वह कमांडर बनने की स्थिति तक पहुंच गया.

एक सूत्र ने बताया, ‘हिडमा को सुरक्षा बलों के खिलाफ अपने अभियानों के लिए जाना जाता है. 2004 के बाद से वह सुरक्षा कर्मियों पर 27 से अधिक हमलों में शामिल रहा है. इसमें 2013 का झीरमघाटी नरसंहार जिसमें कांग्रेस के कई अग्रणी नेता मारे गए थे, अप्रैल 2017 में बुर्कापाल में घात लगाकर किया गया हमला, जिसमें सीआरपीएफ के 24 जवान शहीद हुए और 76 सीआरपीएफ कर्मियों की जान लेने वाला दंतेवाड़ा हमला शामिल है. दंतेवाड़ा हमले का नेतृत्व हिडमा ने ही किया था.’

हिडमा के सिल्गर और बोदगुडा क्षेत्र में मौजूद होने का खास इनपुट मिलने के बाद ही लगभग 2000 सुरक्षाकर्मियों—स्पेशल टास्क फोस (एसटीएफ), डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (डीआरजी), छत्तीसगढ़ पुलिस का जिला बल, सीआरपीएफ और इसकी एलीट यूनिट कोबरा यूनिट—ने इसके खिलाफ 2 अप्रैल को एक संयुक्त अभियान शुरू किया था.

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