व्हीलचेयर प्रतीकात्मक तस्वीर | विकीमीडिया कॉमन्स


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बोर्ड परीक्षाएं स्कूल के छात्रों और अभिभावकों के लिए समान रूप से तनावपूर्ण होती हैं. विशेष रूप से मैकाले के भारत में, जहां बोर्ड परीक्षा के अंकों को युवाओं के जीवन में एक निर्णायक कारक माना जाता है. ऐसे में कल्पना कीजिए विकलांग छात्रों के तनाव और पीड़ा की — चाहे वो व्हीलचेयर इस्तेमाल करते हों, या ऑटिस्टिक, स्पास्टिक या अन्य तरह की शारीरिक समस्याओं से पीड़ित हों. कोविड-19 महामारी के इस दौर में अब जबकि संक्रमितों की संख्या एक बार फिर तेजी से बढ़ रही है, परीक्षा केंद्र जा कर कक्षा 10 और 12 की बोर्ड परीक्षा देने के दबाव को आसान नहीं कहा जा सकता. सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित और व्हीलचेयर पर चलने वाले मेरे बेटे और ऑटिज्म और एडीएचडी जैसी सीखने और बौद्धिक क्षमता से जुड़ी नि:शक्तता वाले उसके सहपाठियों जैसे छात्रों के लिए इस तरह की परीक्षाएं देना एक बड़ी चुनौती है.

अगले कुछ महीनों में, इन विशेष छात्रों को भारत के विभिन्न शहरों के दूर-दराज स्थित परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाना होगा, जहां उनके लिए सुगम्यता की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होती है. उन्हें फेस मास्क पहनना होगा और संभवत:उनके लिए स्क्राइब (लिखने वाले सहायक) उपलब्ध नहीं होंगे, क्योंकि परीक्षा केंद्र जाकर स्क्राइब की जिम्मेदारी निभाने को लेकर उनमें डर का भाव होगा. विकलांग छात्रों को मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है और निर्णय लेने वाले अधिकारियों को इस स्थिति पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करना चाहिए.

एनआईओएस की जिम्मेदारी

21वीं सदी की अभूतपूर्व महामारी के इस दौर में हमें नवाचार अपनाने और छात्रों की विभिन्न ज़रूरतों पर विचार करने की आवश्यकता है. जिम्मेदार अधिकारियों को छात्र समुदाय के वंचित और कमजोर वर्गों की मदद के लिए विशेष पहल करनी चाहिए.

राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा स्थापित शैक्षणिक बोर्ड है. यह दुनिया की सबसे बड़ी मुक्त शिक्षा प्रणालियों में से एक है, जिसमें देशभर के लगभग 30 लाख छात्रों ने नामांकन करा रखा है. इसका नेक उद्देश्य आर्थिक अभाव वाले और विशेष जरूरतों वाले बच्चों की स्कूली शिक्षा सुनिश्चित करना है.

अक्सर अपने फैसलों में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) का अनुकरण करने वाला एनआईओएस, सीबीएसई का परीक्षा कार्यक्रम जारी होने के बाद, जून से निर्धारित बोर्ड परीक्षाओं में शामिल हो रहे विकलांग छात्रों की मदद कर सकता था. हालांकि, इस बार जहां सीबीएसई ने अपने पाठ्यक्रम को कम कर दिया है, एनआईओएस बोर्ड ने ऐसा नहीं किया.

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