महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख. (फाइल फोटो)

महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख. (फाइल फोटो)

Param Bir Singh Letter Bomb: सामना के लेख में सचिन वाजे (Sachin Waze) मामले का भी जिक्र किया गया है. इसमें लिखा है, ‘मुंबई पुलिस आयुक्तालय में बैठकर वाजे वसूली कर रहा था और गृहमंत्री को इस बारे में जानकारी नहीं होगी?’

मुंबई. महाराष्ट्र (Maharashtra) में कोरोना वायरस (Coronavirus) के अलावा राजनीतिक संकट भी जारी है. भ्रष्टाचार के आरोप झेल रहे राज्य के गृहमंत्री अनिल देशमुख (Anil Deshmukh) पर शिवसेना ने ही निशाना साधा है. पार्टी ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ (Saamana) के जरिए सवाल उठाए हैं. साथ ही पार्टी ने गृहमंत्री को कम से कम बोलने की सलाह दी है. खास बात है कि पूर्व पुलिस कमिश्नर ने देशमुख पर भ्रष्टाचार करने के आरोप लगाए हैं.

सामना में लिखा गया है ‘विगत कुछ महीनों में जो कुछ हुआ उसके कारण महाराष्ट्र के चरित्र पर सवाल खड़े किए गए, लेकिन सरकार के पास ‘डैमेज कंट्रोल’ की कोई योजना नहीं है, ये एक बार फिर नजर आया. जो राष्ट्र अपना चरित्र संभालने के प्रति सतर्क नहीं रहता है वो राष्ट्र करीब-करीब खत्म होने जैसा ही है, ऐसा स्पष्ट समझ लेना चाहिए.

लेख में सचिन वाजे मामले का भी जिक्र किया गया है. उन्होंने लिखा मुंबई पुलिस आयुक्तालय में बैठकर वाजे वसूली कर रहा था और गृहमंत्री को इस बारे में जानकारी नहीं होगी? अनिल देशमुख को गृहमंत्री का पद दुर्घटनावश मिल गया. जयंत पाटील, दिलीप वलसे-पाटील ने गृहमंत्री का पद स्वीकार करने से मना कर दिया था. तब यह पद शरद पवार ने देशमुख को सौंपा.

सामना के अनुसार, अनिल देशमुख ने कुछ वरिष्ठ अधिकारियों से बेवजह पंगा लिया. गृहमंत्री को कम-से-कम बोलना चाहिए. बेवजह कैमरे के सामने जाना और जांच का आदेश जारी करना अच्छा नहीं है. संदिग्ध व्यक्ति के घेरे में रहकर राज्य के गृहमंत्री पद पर बैठा कोई भी व्यक्ति काम नहीं कर सकता है. पुलिस विभाग पहले ही बदनाम है. उस पर ऐसी बातों से संदेह बढ़ता है.यह भी पढ़ें: परमबीर सिंह की याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, ‘लेटर बम’ पर महाराष्ट्र में सियासी हलचल जारी

लेख के मुताबिक, ‘पुलिस विभाग का नेतृत्व सिर्फ ‘सैल्यूट’ लेने के लिए नहीं होता है. वह प्रखर नेतृत्व देने के लिए होता है. प्रखरता ईमानदारी से तैयार होती है, ये भूलने से कैसे चलेगा? परमबीर सिंह ने जब आरोप लगाया तब गृह विभाग और सरकार की धज्जियां उड़ी. परंतु महाराष्ट्र सरकार के बचाव में एक भी महत्वपूर्ण मंत्री तुरंत सामने नहीं आया. लोगों को परमबीर का आरोप प्रारंभ में सही लगा इसकी वजह सरकार के पास ‘डैमेज कंट्रोल’ के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी.’

पार्टी ने मुखपत्र के जरिए एक बार फिर महाराष्ट्र के राज्याल भगत सिंह कोश्यारी पर सवालिया निशान लगाए हैं. उन्होंने लिखा ‘महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने इस पूरे दौर में निश्चित तौर पर क्या किया? राज्यपाल आज ठाकरे सरकार जाए इसके लिए राजभवन के समुद्र में बैठकर ईश्वर का अभिषेक कर रहे हैं.’ आगे लिखा गया है ‘अधिकारियों पर निर्भर रहने का परिणाम राज्य सरकार भुगत रही है. सरकार को क्या करना चाहिए ये कहने के लिए यह प्रपंच नहीं है. सरकार फिसलन भरे छोर से फिसल रही है और किस्मत से बच रही है. ‘

बीजेपी प्रवक्ता राम कदम ने भी आर्टिकल प्रकाशित होने के बाद मामले पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि आज के सामना में जो लिखा गया है उससे साफ है कि शिवसेना ने ये मान लिया है कि वाजे मामले में ठाकरे सरकार की धज्जियां उड़ चुकी हैं, और उनका बचाव करने के लिए कोई मंत्री सामने नही आया..’ उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को तो अधिकार है गृहमंत्री को हटाने का, फिर क्यों नहीं हटा रहे, क्या उन्हें इस बात का डर है कि कहीं गृहमंत्री ने मुंह खोल दिया तो शिवसेना फंस जाएगी. वसूली रैकेट में तीनों दल शामिल हैं…







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