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आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत । पीटीआई


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नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत की पुस्तक ‘भविष्य का भारत ’ का उर्दू संस्करण आज राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद (एनसीपीयूएल) द्वारा जारी किया जा रहा है. ‘मुस्तकबिल का भारत’ नामक पुस्तक सितंबर 2018 में भागवत द्वारा विज्ञान भवन में दिए गए व्याख्यानों की श्रृंखला पर आधारित है और इसका कई भारतीय भाषाओं में अनुवाद किया गया है.

पुस्तक के अनुवादक और उर्दू भाषा को बढ़ावा देने के लिए नेशनल काउंसिल फॉर प्रमोशन के निदेशक डॉ अकील अहमद ने कहा कि पुस्तक ‘आरएसएस के बारे में मुसलमानों की गलत धारणाओं को दूर करने का प्रयास’ है. उन्होंने कहा कि यह इस्लामी विद्वानों और मुस्लिम समुदाय के बुद्धिजीवियों को संगठन की विचारधारा को समझने में मदद करेगा.

दिप्रिंट को उन्होंने बताया, ‘हिंदुत्व का विचार मुसलमानों के बिना अधूरा है. यही बात मोहन भागवत जी ने अपने व्याख्यान में इस पुस्तक में व्यक्त की है कि हिंदुत्व हिंदू धर्म नहीं है बल्कि भारत की संस्कृति है. उन्होंने मुस्लिमों से अपील की कि वे आरएसएस की शाखों का हिस्सा बनें. पिछले कुछ सालों से मुस्लिम बुद्धिजीवी आरएसएस को लेकर उत्सुक हैं. इसलिए हमने इस पुस्तक का अनुवाद करने के बारे में सोचा, जो भारत के विचार और देश के भविष्य के निर्माण में हमारी भूमिका के बारे में बताती है.’

डॉ खान ने कहा कि परिषद ने कई इस्लामी विद्वानों, बुद्धिजीवियों और शिक्षाविदों को आमंत्रित किया है, जिसमें आलोचक भी शामिल हैं. संघ के सह-सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल और शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल भी मौजूद रहेंगे.

आरएसएस नेता और मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के संरक्षक इंद्रेश कुमार ने कहा, पहल ‘उर्दू बोलने वाली आबादी को मुख्यधारा में लाने और राष्ट्र के भविष्य के निर्माण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास है’.

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